महाभारत 5.5.15
तच्छ्रुत्वा पाण्डुपुत्राणां समागच्छन्महद्बलम्धृतराष्ट्रसुतश्चापि समानिन्ये महीपतीन्
tacchrutvā pāṇḍuputrāṇāṃ samāgacchanmahadbalamdhṛtarāṣṭrasutaścāpi samāninye mahīpatīn
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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