महाभारत 5.50.17
न स जातु वशे तस्थौ मम बालोऽपि संजयकिं पुनर्मम दुष्पुत्रैः क्लिष्टः संप्रति पाण्डवः
na sa jātu vaśe tasthau mama bālo'pi saṃjayakiṃ punarmama duṣputraiḥ kliṣṭaḥ saṃprati pāṇḍavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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