महाभारत 5.50.38
कृत्स्नेयं पृथिवी देवी जरासंधेन धीमतामागधेन्द्रेण बलिना वशे कृत्वा प्रतापिता
kṛtsneyaṃ pṛthivī devī jarāsaṃdhena dhīmatāmāgadhendreṇa balinā vaśe kṛtvā pratāpitā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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