महाभारत 5.53.6
परुषाण्युच्यमानान्स्म पुरा पार्थानुपेक्षसेकृत्स्नं राज्यं जयन्तीति प्रपातं नानुपश्यसि
paruṣāṇyucyamānānsma purā pārthānupekṣasekṛtsnaṃ rājyaṃ jayantīti prapātaṃ nānupaśyasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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