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महाभारत 5.54.38
गदाप्रहाराभिहतो हिमवानपि पर्वतःसकृन्मया विशीर्येत गिरिः शतसहस्रधा
gadāprahārābhihato himavānapi parvataḥsakṛnmayā viśīryeta giriḥ śatasahasradhā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंगदाप्रहाराभिहतो हिमवानपि पर्वतःसकृन्मया विशीर्येत गिरिः शतसहस्रधा
gadāprahārābhihato himavānapi parvataḥsakṛnmayā viśīryeta giriḥ śatasahasradhā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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