महाभारत 5.54.39
स चाप्येतद्विजानाति वासुदेवार्जुनौ तथादुर्योधनसमो नास्ति गदायामिति निश्चयः
sa cāpyetadvijānāti vāsudevārjunau tathāduryodhanasamo nāsti gadāyāmiti niścayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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