महाभारत 5.54.51
भीष्मद्रोणकृपाणां च तुल्यः कर्णो मतो ममअनुज्ञातश्च रामेण मत्समोऽसीति भारत
bhīṣmadroṇakṛpāṇāṃ ca tulyaḥ karṇo mato mamaanujñātaśca rāmeṇa matsamo'sīti bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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