महाभारत 5.56.3
पृथगक्षौहिणीभ्यां तौ पाण्डवानभिसंश्रितौमहारथौ समाख्यातावुभौ पुरुषमानिनौ
pṛthagakṣauhiṇībhyāṃ tau pāṇḍavānabhisaṃśritaumahārathau samākhyātāvubhau puruṣamāninau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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