महाभारत 5.56.54
स त्वं शूरश्च वीरश्च विक्रान्तश्च नरर्षभभयार्तानां परित्राता संयुगेषु न संशयः
sa tvaṃ śūraśca vīraśca vikrāntaśca nararṣabhabhayārtānāṃ paritrātā saṃyugeṣu na saṃśayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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