महाभारत 5.57.27महद्वो भयमागामि न चेच्छाम्यथ पाण्डवैःगदया भीमसेनेन हताः शममुपैष्यथmahadvo bhayamāgāmi na cecchāmyatha pāṇḍavaiḥgadayā bhīmasenena hatāḥ śamamupaiṣyathaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें