महाभारत 5.6.14
स भवान्धर्मयुक्तश्च धर्म्यं तेषु समाचरन्कृपालुषु परिक्लेशान्पाण्डवानां प्रकीर्तयन्
sa bhavāndharmayuktaśca dharmyaṃ teṣu samācarankṛpāluṣu parikleśānpāṇḍavānāṃ prakīrtayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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