महाभारत 5.6.3कुलेन च विशिष्टोऽसि वयसा च श्रुतेन चप्रज्ञयानवमश्चासि शुक्रेणाङ्गिरसेन चkulena ca viśiṣṭo'si vayasā ca śrutena caprajñayānavamaścāsi śukreṇāṅgirasena caइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें