महाभारत 5.60.28
पितामहश्च द्रोणश्च कृपः शल्यः शलस्तथाअस्त्रेषु यत्प्रजानन्ति सर्वं तन्मयि विद्यते
pitāmahaśca droṇaśca kṛpaḥ śalyaḥ śalastathāastreṣu yatprajānanti sarvaṃ tanmayi vidyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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