महाभारत 5.60.29
इत्युक्त्वा संजयं भूयः पर्यपृच्छत भारतज्ञात्वा युयुत्सुः कार्याणि प्राप्तकालमरिंदम
ityuktvā saṃjayaṃ bhūyaḥ paryapṛcchata bhāratajñātvā yuyutsuḥ kāryāṇi prāptakālamariṃdama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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