महाभारत 5.62.14
तौ युध्यमानौ संरब्धौ मृत्युपाशवशानुगौउपसृत्यापरिज्ञातो जग्राह मृगयुस्तदा
tau yudhyamānau saṃrabdhau mṛtyupāśavaśānugauupasṛtyāparijñāto jagrāha mṛgayustadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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