महाभारत 5.62.2
सर्वे स्म समजातीयाः सर्वे मानुषयोनयःपितामह विजानीषे पार्थेषु विजयं कथम्
sarve sma samajātīyāḥ sarve mānuṣayonayaḥpitāmaha vijānīṣe pārtheṣu vijayaṃ katham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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