महाभारत 5.62.7
तस्मिन्द्वौ शकुनौ बद्धौ युगपत्समपौरुषौतावुपादाय तं पाशं जग्मतुः खचरावुभौ
tasmindvau śakunau baddhau yugapatsamapauruṣautāvupādāya taṃ pāśaṃ jagmatuḥ khacarāvubhau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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