महाभारत 5.62.8
तौ विहायसमाक्रान्तौ दृष्ट्वा शाकुनिकस्तदाअन्वधावदनिर्विण्णो येन येन स्म गच्छतः
tau vihāyasamākrāntau dṛṣṭvā śākunikastadāanvadhāvadanirviṇṇo yena yena sma gacchataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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