महाभारत 5.62.9
तथा तमनुधावन्तं मृगयुं शकुनार्थिनम्आश्रमस्थो मुनिः कश्चिद्ददर्शाथ कृताह्निकः
tathā tamanudhāvantaṃ mṛgayuṃ śakunārthinamāśramastho muniḥ kaściddadarśātha kṛtāhnikaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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