महाभारत 5.66.12कालचक्रं जगच्चक्रं युगचक्रं च केशवःआत्मयोगेन भगवान्परिवर्तयतेऽनिशम्kālacakraṃ jagaccakraṃ yugacakraṃ ca keśavaḥātmayogena bhagavānparivartayate'niśamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें