महाभारत 5.67.3
विद्यया तात जानामि त्रियुगं मधुसूदनम्कर्तारमकृतं देवं भूतानां प्रभवाप्ययम्
vidyayā tāta jānāmi triyugaṃ madhusūdanamkartāramakṛtaṃ devaṃ bhūtānāṃ prabhavāpyayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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