महाभारत 5.68.13
विष्णुर्विक्रमणादेव जयनाज्जिष्णुरुच्यतेशाश्वतत्वादनन्तश्च गोविन्दो वेदनाद्गवाम्
viṣṇurvikramaṇādeva jayanājjiṣṇurucyateśāśvatatvādanantaśca govindo vedanādgavām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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