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महाभारत 5.68.9
हर्षात्सौख्यात्सुखैश्वर्याद्धृषीकेशत्वमश्नुतेबाहुभ्यां रोदसी बिभ्रन्महाबाहुरिति स्मृतः
harṣātsaukhyātsukhaiśvaryāddhṛṣīkeśatvamaśnutebāhubhyāṃ rodasī bibhranmahābāhuriti smṛtaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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