महाभारत 5.7.31
गते दुर्योधने कृष्णः किरीटिनमथाब्रवीत्अयुध्यमानः कां बुद्धिमास्थायाहं त्वया वृतः
gate duryodhane kṛṣṇaḥ kirīṭinamathābravītayudhyamānaḥ kāṃ buddhimāsthāyāhaṃ tvayā vṛtaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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