महाभारत 5.7.33
भवांस्तु कीर्तिमाँल्लोके तद्यशस्त्वां गमिष्यतियशसा चाहमप्यर्थी तस्मादसि मया वृतः
bhavāṃstu kīrtimām̐lloke tadyaśastvāṃ gamiṣyatiyaśasā cāhamapyarthī tasmādasi mayā vṛtaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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