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महाभारत 5.7.35
वासुदेव उवाच · vāsudeva uvāca
उपपन्नमिदं पार्थ यत्स्पर्धेथा मया सहसारथ्यं ते करिष्यामि कामः संपद्यतां तव
upapannamidaṃ pārtha yatspardhethā mayā sahasārathyaṃ te kariṣyāmi kāmaḥ saṃpadyatāṃ tava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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