महाभारत 5.70.32
तं तदा मन्युरेवैति स भूयः संप्रमुह्यतिस मोहवशमापन्नः क्रूरं कर्म निषेवते
taṃ tadā manyurevaiti sa bhūyaḥ saṃpramuhyatisa mohavaśamāpannaḥ krūraṃ karma niṣevate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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