महाभारत 5.70.49
युद्धे कृष्ण कलिर्नित्यं प्राणाः सीदन्ति संयुगेबलं तु नीतिमात्राय हठे जयपराजयौ
yuddhe kṛṣṇa kalirnityaṃ prāṇāḥ sīdanti saṃyugebalaṃ tu nītimātrāya haṭhe jayaparājayau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें