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महाभारत 5.70.84
न हि नः प्रीणयेद्द्रव्यं न देवत्वं कुतः सुखम्न च सर्वामरैश्वर्यं तव रोधेन माधव
na hi naḥ prīṇayeddravyaṃ na devatvaṃ kutaḥ sukhamna ca sarvāmaraiśvaryaṃ tava rodhena mādhava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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