महाभारत 5.70.88
न जातु गमनं तत्र भवेत्पार्थ निरर्थकम्अर्थप्राप्तिः कदाचित्स्यादन्ततो वाप्यवाच्यता
na jātu gamanaṃ tatra bhavetpārtha nirarthakamarthaprāptiḥ kadācitsyādantato vāpyavācyatā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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