महाभारत 5.71.10
एतदेव निमित्तं ते पाण्डवास्तु यथा त्वयिनान्वतप्यन्त कौपीनं तावत्कृत्वापि दुष्करम्
etadeva nimittaṃ te pāṇḍavāstu yathā tvayinānvatapyanta kaupīnaṃ tāvatkṛtvāpi duṣkaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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