महाभारत 5.71.33
कौरवाणां प्रवृत्तिं च गत्वा युद्धाधिकारिकाम्निशाम्य विनिवर्तिष्ये जयाय तव भारत
kauravāṇāṃ pravṛttiṃ ca gatvā yuddhādhikārikāmniśāmya vinivartiṣye jayāya tava bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें