महाभारत 5.71.8यावच्च मार्दवेनैतान्राजन्नुपचरिष्यसितावदेते हरिष्यन्ति तव राज्यमरिंदमyāvacca mārdavenaitānrājannupacariṣyasitāvadete hariṣyanti tava rājyamariṃdamaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें