महाभारत 5.72.10
दुर्योधनस्य क्रोधेन भारता मधुसूदनधक्ष्यन्ते शिशिरापाये वनानीव हुताशनैः
duryodhanasya krodhena bhāratā madhusūdanadhakṣyante śiśirāpāye vanānīva hutāśanaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें