महाभारत 5.73.20
तवैषा विकृता बुद्धिर्गवां वागिव मानुषीमनांसि पाण्डुपुत्राणां मज्जयत्यप्लवानिव
tavaiṣā vikṛtā buddhirgavāṃ vāgiva mānuṣīmanāṃsi pāṇḍuputrāṇāṃ majjayatyaplavāniva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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