महाभारत 5.73.23न चैतदनुरूपं ते यत्ते ग्लानिररिंदमयदोजसा न लभते क्षत्रियो न तदश्नुतेna caitadanurūpaṃ te yatte glānirariṃdamayadojasā na labhate kṣatriyo na tadaśnuteइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें