महाभारत 5.74.4
कथं हि भीमसेनं मां जानन्कश्चन माधवब्रूयादप्रतिरूपाणि यथा मां वक्तुमर्हसि
kathaṃ hi bhīmasenaṃ māṃ jānankaścana mādhavabrūyādapratirūpāṇi yathā māṃ vaktumarhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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