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महाभारत 5.75.17
ते चेदभिनिवेक्ष्यन्ति नाभ्युपैष्यन्ति मे वचःकुरवो युद्धमेवात्र रौद्रं कर्म भविष्यति
te cedabhinivekṣyanti nābhyupaiṣyanti me vacaḥkuravo yuddhamevātra raudraṃ karma bhaviṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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