महाभारत 5.75.3
यथा चात्मनि कल्याणं संभावयसि पाण्डवसहस्रगुणमप्येतत्त्वयि संभावयाम्यहम्
yathā cātmani kalyāṇaṃ saṃbhāvayasi pāṇḍavasahasraguṇamapyetattvayi saṃbhāvayāmyaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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