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महाभारत 5.76.11
शर्म तैः सह वा नोऽस्तु तव वा यच्चिकीर्षितम्विचार्यमाणो यः कामस्तव कृष्ण स नो गुरुः
śarma taiḥ saha vā no'stu tava vā yaccikīrṣitamvicāryamāṇo yaḥ kāmastava kṛṣṇa sa no guruḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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