महाभारत 5.76.12
न स नार्हति दुष्टात्मा वधं ससुतबान्धवःयेन धर्मसुते दृष्ट्वा न सा श्रीरुपमर्षिता
na sa nārhati duṣṭātmā vadhaṃ sasutabāndhavaḥyena dharmasute dṛṣṭvā na sā śrīrupamarṣitā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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