महाभारत 5.76.3अफलं मन्यसे चापि पुरुषस्य पराक्रमम्न चान्तरेण कर्माणि पौरुषेण फलोदयःaphalaṃ manyase cāpi puruṣasya parākramamna cāntareṇa karmāṇi pauruṣeṇa phalodayaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें