महाभारत 5.76.4
तदिदं भाषितं वाक्यं तथा च न तथैव चन चैतदेवं द्रष्टव्यमसाध्यमिति किंचन
tadidaṃ bhāṣitaṃ vākyaṃ tathā ca na tathaiva cana caitadevaṃ draṣṭavyamasādhyamiti kiṃcana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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