महाभारत 5.8.23
विदितं ते महाराज लोकतत्त्वं नराधिपतस्माल्लोभकृतं किंचित्तव तात न विद्यते
viditaṃ te mahārāja lokatattvaṃ narādhipatasmāllobhakṛtaṃ kiṃcittava tāta na vidyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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