महाभारत 5.80.24
साहं केशग्रहं प्राप्ता परिक्लिष्टा सभां गतापश्यतां पाण्डुपुत्राणां त्वयि जीवति केशव
sāhaṃ keśagrahaṃ prāptā parikliṣṭā sabhāṃ gatāpaśyatāṃ pāṇḍuputrāṇāṃ tvayi jīvati keśava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें