महाभारत 5.81.21
तं मेरुशिखरप्रख्यं मेघदुन्दुभिनिस्वनम्आरुरोह रथं शौरिर्विमानमिव पुण्यकृत्
taṃ meruśikharaprakhyaṃ meghadundubhinisvanamāruroha rathaṃ śaurirvimānamiva puṇyakṛt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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