महाभारत 5.81.2
पाण्डवैर्धार्तराष्ट्राणां प्रतिपाद्यमनामयम्समर्थः प्रशमं चैषां कर्तुं त्वमसि केशव
pāṇḍavairdhārtarāṣṭrāṇāṃ pratipādyamanāmayamsamarthaḥ praśamaṃ caiṣāṃ kartuṃ tvamasi keśava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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