महाभारत 5.81.60
अथापश्यन्महाबाहुरृषीनध्वनि केशवःब्राह्म्या श्रिया दीप्यमानान्स्थितानुभयतः पथि
athāpaśyanmahābāhurṛṣīnadhvani keśavaḥbrāhmyā śriyā dīpyamānānsthitānubhayataḥ pathi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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