महाभारत 5.84.19
दुःशासनस्य च गृहं दुर्योधनगृहाद्वरम्तदस्य क्रियतां क्षिप्रं सुसंमृष्टमलंकृतम्
duḥśāsanasya ca gṛhaṃ duryodhanagṛhādvaramtadasya kriyatāṃ kṣipraṃ susaṃmṛṣṭamalaṃkṛtam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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