महाभारत 5.84.2आहुकानामधिपतिः पुरोगः सर्वसात्वताम्महामना महावीर्यो महामात्रो जनार्दनःāhukānāmadhipatiḥ purogaḥ sarvasātvatāmmahāmanā mahāvīryo mahāmātro janārdanaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें